Class 8 Sanskrit Full Book Notes in Hindi – NCERT संस्कृत रुचिरा भाग-3 | BexyHub

Class 8 Sanskrit Full Book Notes in Hindi – NCERT संस्कृत रुचिरा भाग-3 | BexyHub

प्रस्तावना (Introduction):


स्वागत है दोस्तों! BexyHub पर आज हम कक्षा 8 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘रुचिरा (तृतीयो भागः)’ और संस्कृत व्याकरण के सभी महत्वपूर्ण अध्यायों को एक ही लेख में कवर करेंगे। संस्कृत देववाणी है और इसे समझना बहुत ही आनंददायक है। यहाँ हमने हर पाठ का सार, शब्दार्थ और व्याकरण के नियमों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया है।

सुभाषितानि (अच्छे विचार)


इस पाठ में जीवन के अनमोल सूत्र दिए गए हैं:
परोपकार: जिस तरह नदियाँ अपना जल स्वयं नहीं पीतीं और वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते, उसी तरह सज्जनों का जीवन परोपकार के लिए होता है।
परिश्रम: भाग्य के भरोसे रहने वाले व्यक्ति को कुछ प्राप्त नहीं होता, इसलिए पुरुषार्थ (मेहनत) करना ज़रूरी है।
गुण: गुण जब तक गुणी व्यक्ति के पास होते हैं, तब तक वे गुण रहते हैं, लेकिन निर्गुण के पास जाकर वे दोष बन जाते हैं।

बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता (गुफा की आवाज़ मैंने कभी नहीं सुनी)


यह ‘पंचतंत्र’ की एक प्रसिद्ध कहानी है।
सार: एक गीदड़ अपनी चतुराई से अपनी जान बचाता है। जब उसे शक होता है कि गुफा के अंदर सिंह (शेर) है, तो वह गुफा से बात करने का नाटक करता है। शेर मूर्खता में उत्तर दे देता है और गीदड़ समझ जाता है कि अंदर खतरा है।
शिक्षा: आने वाली मुसीबत का अंदाज़ा लगाकर समझदारी से काम लेना चाहिए।

डीजीभारतम् (डिजिटल इंडिया)


यह पाठ आधुनिक तकनीक और ‘Digital India’ के महत्व को बताता है।
मुख्य बिंदु: प्राचीन काल में ज्ञान श्रुति-परंपरा (सुनकर) से चलता था, फिर कागज़ आया और अब कंप्यूटर का युग है। आज हम मोबाइल के माध्यम से कहीं भी पैसे भेज सकते हैं और कोई भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ‘कैशलेस’ लेनदेन (Cashless Transaction) पर इसमें विशेष ज़ोर दिया गया है।

संस्कृत व्याकरण: शब्द रूपाणि (Word Forms)


संस्कृत सीखने के लिए शब्द रूप सबसे मज़बूत नींव हैं:
अकारान्त पुल्लिंग (जैसे बालक, राम): प्रथमा से सप्तमी विभक्ति तक के रूप।
आकारान्त स्त्रीलिंग (जैसे लता, रमा): बालिकाओं और महिलाओं के लिए प्रयोग होने वाले रूप।
नपुंसकलिंग (जैसे फल, पुष्प): निर्जीव वस्तुओं के लिए प्रयोग होने वाले रूप।

धातु रूपाणि (Verb Forms)


क्रिया के काल को बताने के लिए धातु रूप का प्रयोग होता है:
लट् लकार (वर्तमान काल): पठति, पठतः, पठन्ति।
लृट् लकार (भविष्यत काल): पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति।


लङ् लकार (भूतकाल):

अपठत्, अपठताम्, अपठन्।
दीपक भाई, यह संस्कृत का पहला भाग है। अभी इसमें ये चीज़ें बाकी हैं:
कण्टकेनैव कण्टकम् (काँटे से ही काँटा निकलता है – कहानी)
भगवदज्जुकम् और सप्तभगिन्यः (पूर्वोत्तर राज्यों की जानकारी)


संधि और प्रत्यय (संस्कृत व्याकरण का मुख्य हिस्सा)
चित्र वर्णन और पत्र लेखन (जो परीक्षा में पक्का आता है)

कण्टकेनैव कण्टकम् (काँटे से ही काँटा निकलता है)
यह मध्य प्रदेश के डिण्डौरी जिले में प्रधानों के बीच प्रचलित एक लोककथा है।


सार:

चंचल नाम का एक शिकारी एक बाघ को जाल से आज़ाद करता है, लेकिन बाघ उसे ही खाना चाहता है। तब एक लोमड़ी (लोमशिका) अपनी चतुराई से बाघ को वापस जाल में फँसा देती है।


शिक्षा:

“शठे शाठ्यं समाचरेत्” अर्थात दुष्ट के साथ दुष्टता का व्यवहार करके ही बचा जा सकता है। संकट के समय बुद्धि का प्रयोग करना ही श्रेष्ठ है।

भारतजनताऽहम् (मैं भारत की जनता हूँ)


यह आधुनिक कविकुलशिरोमणि डॉ. रमाकान्त शुक्ल द्वारा रचित है।
मुख्य बिंदु: भारत की जनता स्वाभिमानी, ज्ञान-विज्ञान से भरपूर और कला-प्रिय है। हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) मानते हैं। हमारे लिए अध्यात्म रूपी नदी में स्नान करना सबसे पवित्र है।

संसारसागरस्य नायकाः (संसार रूपी सागर के नायक)


यह पाठ राजस्थान के लावण्यमयी शिल्पकारों और तालाब बनाने वालों (गजधर) पर आधारित है।
सार: पुराने समय में जो तालाब और बावड़ियाँ बनाई जाती थीं, उन्हें बनाने वाले ‘गजधर’ कहलाते थे। वे समाज के शिल्पी थे। पाठ में उनके सम्मान और उनकी लुप्त होती कला के बारे में बताया गया है।

सप्तभगिन्यः (सात बहनें)


यह उत्तर-पूर्व (North-East) के सात राज्यों के लिए प्रयोग किया जाने वाला एक उपनाम है।
सात राज्य: अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा।
विशेषता: ये राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति (जैसे बाँस की वस्तुएँ) और लोक नृत्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ की ‘बाँस कला’ (Bamboo Craft) विश्व प्रसिद्ध है।

संस्कृत व्याकरण:

सन्धि प्रकरणम् (Sandhi)
संस्कृत में संधि के बिना वाक्यों को समझना मुश्किल है:
दीर्घ सन्धि: अ + अ = आ (जैसे: विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)।


गुण सन्धि:

अ + इ = ए (जैसे: उप + इन्द्रः = उपेन्द्रः)।
वृद्धि सन्धि: अ + ए = ऐ (जैसे: सदा + एव = सदैव)।

प्रत्यय ज्ञानम् (Suffixes)


शब्दों के अंत में जुड़कर अर्थ बदलने वाले शब्द:


क्त्वा (Ktva): ‘करके’ के अर्थ में (जैसे: पठ् + क्त्वा = पठित्वा – पढ़कर)।
तुमुन् (Tumun): ‘के लिए’ के अर्थ में (जैसे: हस् + तुमुन् = हसितुम – हँसने के लिए)।
ल्यप् (Lyap): जब उपसर्ग लगा हो (जैसे: वि + हस् + ल्यप् = विहस्य – हँसकर)।

संख्यावाची शब्दाः (Sanskrit Numbers)


संस्कृत में गिनती को समझना बहुत ज़रूरी है, खासकर एक से चार तक क्योंकि इनके रूप लिंग के अनुसार बदलते हैं:
1 से 10 तक: एकः, द्वौ, त्रयः, चत्वारः, पञ्च, षट्, सप्त, अष्ट, नव, दश।
11 से 20 तक: एकादश, द्वादश, त्रयोदश, चतुर्दश, पञ्चदश, षोडश, सप्तदश, अष्टादश, नवदश, विंशतिः।
विशेष: ‘विंशतिः’ (20), ‘त्रिंशत्’ (30), ‘चत्वारिंशत्’ (40), ‘पञ्चाशत्’ (50)।

समय लेखनम् (Time in Sanskrit)


परीक्षा में घड़ी देखकर समय लिखने का सवाल ज़रूर आता है:
पूर्ण समय: 5 बजे – पञ्चवादनम्।
सवा (15 min): सपाद (सपाद पञ्चवादनम्)।
साढ़े (30 min): सार्ध (सार्ध पञ्चवादनम्)।
पौने (45 min): पादोन (पादोन षड्वादनम् – पौने छह)।

अशुद्धि संशोधनम् (Correction of Errors)


संस्कृत वाक्यों में कर्ता और क्रिया का मेल होना चाहिए:
अशुद्ध: बालकः पठन्ति। — शुद्ध: बालकः पठति। (एकवचन कर्ता के साथ एकवचन क्रिया)
अशुद्ध: ते पठति। — शुद्ध: ते पठन्ति। (बहुवचन के साथ बहुवचन क्रिया)

चित्र वर्णनम् (Picture Description)


परीक्षा में एक चित्र दिया जाता है और उस पर 5 वाक्य लिखने होते हैं।
टिप: हमेशा सरल वाक्यों का प्रयोग करें जैसे: “इदं चित्रं उद्यानम अस्ति।” (यह चित्र बगीचे का है), “अत्र वृक्षाः सन्ति।” (यहाँ वृक्ष हैं)।
विशेष सुझाव: संस्कृत में 100% अंक कैसे प्राप्त करें?
शब्दरूप याद करें: ‘बालक’ और ‘लता’ के शब्द रूप याद करने से आप आधे से ज़्यादा अनुवाद खुद कर पाएंगे।


धातु रूप: ‘पठ्’ और ‘गम्’ धातु के पाँचों लकारों को लिखकर याद करें।
सुलेख: संस्कृत में विसर्ग (:) और हलन्त (्) का बहुत महत्व है, इन्हें लगाने में गलती न करें।


निष्कर्ष (Conclusion)


हमें उम्मीद है कि Class 8 Sanskrit Full Book Notes का यह संग्रह आपको देववाणी संस्कृत को समझने और परीक्षा में सफलता पाने में मदद करेगा। BexyHub पर हमारा प्रयास है कि हर विषय को आपकी अपनी भाषा में आसान बनाया जाए।
लेखक: यह लेख Deepak Kumar (Nursing Officer) द्वारा तैयार किया गया है, जो चिकित्सा के साथ-साथ शिक्षा की सेवा में भी तत्पर हैं।

Meet the Expert – Deepak Kumar


“Namaste doston! Mera naam Deepak Kumar hai aur main ek dedicated Nursing professional hoon. Maine apni Nursing education mein GNM, Post BSc Nursing, aur MSc Nursing ki degree haasil ki hai.
Pichle kai saalon se main ek Nursing Officer ke roop mein ICU (Intensive Care Unit) mein kaam kar raha hoon. Mera rozana ka kaam critical patients ki care karna aur medical emergencies ko handle karna raha hai. Is practical experience ne mujhe wo baatein sikhayi hain jo sirf kitabon mein nahi milti.
Bexyhub banane ka mera maqsad yahi hai ki main apne isi ‘Real-life Clinical Experience’ ko aap sab ke sath share kar sakun. Yahan aapko jo bhi notes ya MCQs milenge, wo mere khud ke anubhav aur deep research par aadharit hain. Mera lakshya hai ki har nursing student ko quality educational content mile taaki wo apne exams aur career mein safal ho sakein.”


महत्वपूर्ण सूचना (Disclaimer):
यह पोस्ट केवल शैक्षिक उद्देश्यों (Educational Purposes) के लिए साझा की गई है। यहाँ दी गई जानकारी मेरे नर्सिंग अनुभव और अध्ययन पर आधारित है। यदि आपको किसी जानकारी पर संदेह है या कोई शिकायत है, तो कृपया कमेंट बॉक्स में बताएं या हमसे संपर्क करें। किसी भी चिकित्सीय निर्णय के लिए पेशेवर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

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